गढ़वा। भारत माता की महिमा और राष्ट्रप्रेम की भावना को समर्पित “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बी.एन.टी. सें...
गढ़वा। भारत माता की महिमा और राष्ट्रप्रेम की भावना को समर्पित “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बी.एन.टी. सेंट मैरी स्कूल, गढ़वा में एक भव्य एवं प्रेरणादायक विशेष प्रातःकालीन प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विद्यालय परिसर देशभक्ति, उत्साह और श्रद्धा की भावना से ओतप्रोत रहा।इस कार्यक्रम का संचालन Khurana House के नेतृत्व में किया गया। सभा का शुभारंभ विद्यालय प्रार्थना से हुआ, जिसके पश्चात विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया। तत्पश्चात वंदे मातरम् पर आधारित भाषण प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी (Quiz) एवं देशभक्ति गीत प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं।
विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में वंदे मातरम् की रचना वर्ष 1875, प्रकाशन वर्ष 1882, इसके प्रथम सार्वजनिक गायन वर्ष 1896, तथा इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दिए जाने की तिथि 24 जनवरी 1950 से संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रधानाचार्य अमित तिवारी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से उल्लेख किया कि वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के कोलकाता अधिवेशन में “वंदे मातरम्” को पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया था, जब रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे अपने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया था। वह क्षण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत प्रेरणादायक और भावनात्मक था, जिसने राष्ट्र के प्रति समर्पण और त्याग की भावना को जन-जन तक पहुँचा दिया।विद्यार्थियों ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान तथा “वंदे मातरम्” की रचना के ऐतिहासिक महत्व पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि “वंदे मातरम्” मूल रूप से बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास “आनंदमठ” (प्रकाशित वर्ष 1882) में शामिल है, जिसमें यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का प्रेरणास्रोत बनकर उभरा। यह उपन्यास और गीत दोनों ही उस कालखंड की राष्ट्रभक्ति भावना के प्रतीक हैं, जिन्होंने असंख्य देशभक्तों के हृदय में आज़ादी की ज्योति प्रज्वलित की।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य श्री तिवारी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि — “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, इसकी संस्कृति और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है।”उन्होंने विद्यार्थियों से देशभक्ति, अनुशासन, निष्ठा और एकता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।अंत में सभी विद्यार्थियों, शिक्षक एवं शिक्षिकाओं द्वारा “वंदे मातरम्” का सामूहिक रूप से गायन किया गया, जिससे सम्पूर्ण विद्यालय परिसर देशभक्ति के उल्लास और गौरव से गूंज उठा।
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