गढ़वा। शहर के बीचों-बीच चिनिया रोड से महज कुछ दूरी पर स्थित शिव मंदिर के आसपास का इलाका पिछले दो दिनों की बारिश के बाद पूरी तरह ...
गढ़वा। शहर के बीचों-बीच चिनिया रोड से महज कुछ दूरी पर स्थित शिव मंदिर के आसपास का इलाका पिछले दो दिनों की बारिश के बाद पूरी तरह जलमग्न होकर गंभीर संकट में तब्दील हो गया है। हालात ऐसे हैं कि यहां रहने वाले लोगों के लिए घर से बाहर निकलना तक किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है। जिस रास्ते से प्रतिदिन हजारों लोग सदर अस्पताल, ब्लॉक रोड और शहर के अन्य हिस्सों की ओर आवागमन करते हैं, वही रास्ता इस समय पानी के विशाल जलाशय में तब्दील हो चुका है।शिव मंदिर के पास से निकलने वाले दो-तीन प्रमुख संपर्क मार्गों पर करीब साढ़े तीन फीट तक पानी जमा होने की बात स्थानीय लोग बता रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि पैदल निकलना भी मुश्किल है। साइकिल और मोटरसाइकिल तो दूर, छोटे चारपहिया वाहन भी इस रास्ते से गुजरने का जोखिम नहीं उठा पा रहे हैं। बड़ी गाड़ियों के लिए तो रास्ता लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है। घर से निकलना भी बना आफत, पानी में डूब रही सड़क
स्थानीय लोगों के अनुसार, घर के बाहर निकलते ही कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर पैर गहरे पानी में चला जाता है। कई जगह सड़क और जलजमाव की सीमा तक पहचान में नहीं आ रही है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और बीमार लोगों के लिए स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।सबसे बड़ी चिंता उन मरीजों और उनके परिजनों को लेकर है जिन्हें सदर अस्पताल तक पहुंचना होता है। यदि किसी मरीज को अचानक अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़ जाए तो इस जलमग्न मार्ग के कारण समय पर अस्पताल पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान यह महज जलजमाव नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए आवागमन और सुरक्षा का संकट बन जाता है।
दो दिन की बारिश ने खोली वर्षों पुरानी समस्या की पोल
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह समस्या आज की नहीं है। उनका कहना है कि हल्की बारिश में भी वर्षों से इस इलाके में पानी जमा होता आ रहा है। लेकिन जब लगातार बारिश होती है तो स्थिति भयावह रूप ले लेती है और पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है।लोगों का कहना है कि वर्षों से समस्या सामने होने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। हर साल बारिश आती है, सड़कें डूबती हैं, लोग परेशान होते हैं और कुछ दिनों बाद पानी उतरने के साथ मामला भी शांत हो जाता है। लेकिन अगली बारिश में वही समस्या फिर सामने खड़ी हो जाती है।
‘नगर परिषद आखिर किस काम के लिए?’—जनता का सीधा सवाल
जलजमाव से परेशान स्थानीय लोगों में नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि शहर के बीचों-बीच स्थित आबादी वाले इलाके में वर्षों से जलनिकासी की समस्या बनी हुई है और बारिश होते ही मुख्य संपर्क मार्ग बंद हो जाते हैं, तो आखिर नगर परिषद का गठन किस उद्देश्य से किया गया है?
लोगों का कहना है कि नगर परिषद क्षेत्र में रहने वाली जनता नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभाती है, लेकिन बदले में उसे मूलभूत सुविधाओं के लिए भी हर साल संघर्ष करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करना नगर परिषद की जिम्मेदारी नहीं है? क्या हर वर्ष बारिश के बाद इसी तरह लोगों को जलजमाव के बीच जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?
सिर्फ पानी नहीं, स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी बड़ा खतरा
लगातार जमा पानी अब केवल आवागमन की समस्या नहीं रह गया है। लंबे समय तक जलजमाव रहने से गंदगी, मच्छरों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। घरों के आसपास पानी जमा रहने से स्थानीय लोगों के सामने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी पैदा होने की आशंका है।वहीं, पानी के नीचे सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देने के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। गड्ढे, नाले या सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से जलभराव के कारण दिखाई नहीं देते। ऐसे में पैदल या दोपहिया वाहन से गुजरने वाला व्यक्ति कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अब स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल पानी निकालने की अस्थायी व्यवस्था से काम नहीं चलेगा। इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था, नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्ग का निर्माण और सड़क की आवश्यक मरम्मत जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराने की मांग लोगों ने की है।लोगों का कहना है कि शहर के बीचों-बीच ऐसा जलजमाव होना पूरे नगर व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि मुख्य आबादी वाले इलाके में दो दिन की बारिश के बाद आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाए और लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हो जाएं, तो इसे सामान्य जलजमाव मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।अब लोगों की निगाहें नगर परिषद, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनता जानना चाहती है कि आखिर वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा।बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या समस्या भी उतरेगी या अगली बारिश में फिर यही तस्वीर सामने आएगी? शहर के बीचों-बीच जलमग्न यह इलाका अब महज एक स्थानीय परेशानी नहीं, बल्कि नगर की जलनिकासी व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुका है।खबर देखने के लिए channel को सब्सक्राइब करें, बेल आइकॉन को दबाएं, लाइक करें औऱ लिंक को शेयर करें।


टिप्पणियाँ