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नोटिस : गढ़वा समाचार देखने के लिए प्ले स्टोर से गढ़वा समाचार डाउन लोड करे : वीडियो के साथ यूट्यूब पर भी पूरा देखे,खबरे फेसबुक पर भी उपलब्ध है ,यूट्यूब पर सब्सक्राइब जरुर करें और शेयर करना ना भूलें
इस कारण पूरा शहर पटाखा छूटने की आवाज से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे मिथिलेश समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
मिथिलेश समर्थकों का कहना था कि हमें इस बात की काफी खुशी है कि इतने वर्षों के संघर्ष के बाद मिथिलेश भैया को गढ़वा की जनता ने अपना प्यार और आशीर्वाद दिया है। यह हम लोगों के लिए बहुत ही खुशी का अवसर है।
मिथिलेश ठाकुर ने आज सुबह 8:00 बजे मतगणना हॉल में जाने से पहले मां गढ़देवी से का आशीर्वाद लिया उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मतगणना में पहुंचे थे गढ़वा विधानसभा के मतों की गिनती की शुरुआत मेराल प्रखंड के पढुआ से शुरू हुआ, पहले राउंड में ही मिथिलेश कुमार ठाकुर को 3769 मत मिले, जबकि सत्येंद्रनाथ तिवारी को महज 1662 वोट ही प्राप्त हुआ। भवनाथपुर विधानसभा से पहली बार खिला कमल, रिकॉर्ड मत से जीते भानु
भवनाथपुर विधानसभा से पहली बार खिला कमल, रिकॉर्ड मत से जीते भानु गढ़वा : भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार कमल खिला है। अब तक विधानसभा चुनाव में भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से कभी भी भाजपा का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका था। इस मिथ्या को भानु प्रताप शाही ने तोड़ दी है। इससे भानु प्रताप शाही अपनी पार्टी नौजवान संघर्ष मोर्चा के विधायक रहते भाजपा में शामिल होकर 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाई एवं जीत हासिल कर इस मिथक को तोड़ा।

भानु प्रताप शाही ने अपनी पार्टी नौजवान संघर्ष मोर्चा का भाजपा में विलय करने के बाद बोला था कि भवनाथपुर विधानसभा से आजादी के बाद पहली बार कमल खिलेगा और भाजपा को जीत का तोहफा देंगे। उनकी विपरीत परिस्थिति में चुनाव जीतकर इस बात को सही साबित कर दिया।बताते चलें कि 2014 में भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक अनंत प्रताप देव का इस बार भी बीजेपी से टिकट के प्रबल दावेदार थे।परंतु पार्टी ने पूर्व विधायक अनंत प्रताप देव की टिकट काटकर भानु प्रताप को उम्मीदवार बनाया था।
भानु प्रताप ने पार्टी के फैसले को सही हराने में कामयाब हो गए।भानु प्रताप की जीत से जहां उन्होंने पार्टी से किया गया वादा को पूरा किया। वही जो लोग भाजपा में रहते हुए भानु का विरोध किया उन्हें भी करारा जवाब मिल गया।बताते चलें कि भानु प्रताप शाही वर्ष 2005 के विधान सभा में अपनी पार्टी नवजवान संघर्ष मोर्चा
बनाकर चुनाव लड़े और चुनाव जीतकर पहली बार झारखंड विधानसभा पहुंचे थे।
पर वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े अनंत प्रताप देव ने भानु प्रताप शाही को पराजित कर दिया।इसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव के ठीक पहले अनंत प्रताप देव पाला बदलकर भाजपा के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे। तब भानु प्रताप शाही इन्हें पटकनी देकर दूसरी बार विधान सभा पहुंचने में सफलता प्राप्त किया।चौथी बार भानु प्रताप भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर यह साबित कर दिए कि मतदाता के दिल में जो रहेगा वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ें जीत निश्चित है।

भानु को भाजपा में शामिल होने पर लोग कहा करते थे कि आज तक भाजपा यहां से कभी नहीं जीती है और इस बार भी भानु भाजपा में जाकर गलती किए हैं चुनाव नहीं जीत पाएंगे।क्योंकि पिछली बार कांग्रेस से पाला बदलकर भाजपा में शामिल हुए अनंत प्रताप देव को भी मतदाताओं ने खारिज कर दिया था।
भवनाथपुर में भाजपा की जमीन नहीं है।पर इसे झूठलाते हुए भवनाथपुर के मतदाताओं ने लगातार भानु प्रताप शाही पर विश्वास जताया है। भानु ने इस मिथक को भी तोड़ा कि भवनाथपुर से लगातार कोई विधायक दूसरी बार चुनाव नहीं जीत सकता है।
हालांकि इस मिथक को बहुत पहले जनता दल के वरीय नेता (अब स्वर्गीय) गिरिवर पांडेय तोड़ चुके थे। फिर भी लोग इसकी चर्चा करते थे कि दूसरी बार लगातार जीतना यहां से कठिन है।भानू प्रताप शाही को कुल 96700 वोट मिले, बसपा प्रत्याशी सोगरा बेगम को 56894 एवं निर्दलीय प्रत्याशी अनंत प्रताप देव को 52898 वोट मिले।
मिथिलेश के बचपन का संग-मेहनत लाया रंग, गढ़वा में बनाये घर तो लोगों ने बसा लिया गढवा : झामुमो सह महागठबंधन के नवनिर्वाचित विधायक मिथिलेश कुमार ठाकुर का बचपन गढ़वा में बीता है। बचपन का संग तथा लगातार मेहनत इस बार रंग लाया और पलामू में भाजपा के लहर में भी उन्होंने भाजपा के निवर्तमान विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को 23244 मतों से पराजित कर दिया।
मिथिलेश ठाकुर की बचपन में उनके पिता जी गढवा – वन विभाग में कार्यरत थे। पिताजी के
साथ श्री ठाकुर का बचपन गढ़वा में ही बिता है, उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा यही से प्राप्त की है। बाद में पिताजी के चाईबासा चले जाने की भाभी गढ़वा में बचपन की बीती यादें उन्होंने नहीं भूली उन्हें गढ़वा याद आती रही। यही वजह रही की मिथिलेश को गढ़वा भा गया। बचपन में मिथिलेश को लोग प्यार से मुन्नू के नाम से पुकारते थे। लोगों से मुन्नू का जबरदस्त लगाव था। यह भी एक वजह रहा कि मुन्नू गढ़वा को अपना कार्य क्षेत्र बनाने का मन बनाया। मुन्नू उर्फ मिथलेश ने वर्ष 2009 में पहली बार गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से चुंनाव लडे। इसके पूर्व ही उन्होंने लोगों की मदद एवं समाजसेवा से अपने कार्य की शुरूआत की। वे गर्मी में लोगों के लिए पेयजल उपलब्ध कराना शुरू किया। तो ठंड में गरीब-असहाय के बीच कंबल का वितरण। इसके अलावा लोगों की मदद एवं दुख सुख में शामिल रहे। देवा और संघर्ष के बदौलत
गढ़वा के सुदूरवर्ती क्षेत्र में भी उनकी पहचान बनती गई। 2009 में चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने दूसरी बार 2014 का चुनाव पूरे दमखम से लड़ा। परंतु भाजपा की लहर में दूसरी बार भी उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई। दो बार चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया तथा पूर्व की भांति वे लगातार क्षेत्र में बने रहे। गढ़वा में अपना घर नहीं रहने की वजह से बाहरी का लगरहा कलंक धोने के लिए उन्होंने गढवा के कल्याणपुर में अपना बनाया तो गढ़वा के लोगों ने उन्हें चुनाव जीता कर यहां बता दिया। 2019 के विधानसभा चुनाव में जनता ने मिथिलेश ठाकुर की सेवा तथा संघर्ष के साथ-साथ सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें आशीर्वाद स्वरूप अपना बहुमूल्य वोट देकर विधायक चुन लिया।


















