गढ़वा । नगर परिषद क्षेत्र में शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के ...
गढ़वा। नगर परिषद क्षेत्र में शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के बीचों-बीच स्थित विद्यालयों के बेहद नजदीक कचरे का अंबार और उससे उठती सड़ांध ने नौनिहालों, शिक्षकों तथा आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। एक ओर निजी विद्यालय है तो दूसरी ओर सरकारी विद्यालय के रूप में संचालित डीएवी मॉडल स्कूल, लेकिन दोनों विद्यालयों से कुछ ही दूरी पर दानरो नदी के समीप लगातार कचरा डंप किए जाने से स्थिति गंभीर होती जा रही है।खासकर सावन के पवित्र महीने में जब श्रद्धालु पूजा-पाठ और धार्मिक आस्था में लीन हैं, ऐसे समय में नदी के आसपास कचरे का जमावड़ा और उससे फैलती दुर्गंध नगर परिषद की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सोमवार को हुई बारिश के बाद स्थिति और भी बदतर हो गई। नदी के किनारे फेंके गए कचरे से उठ रही तेज सड़ांध ने आसपास के पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
डीएवी मॉडल स्कूल के निदेशक सुशील कुमार केसरी ने विद्यालय में छात्र-छात्राओं की परेशानी को देखते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मंगलवार की सुबह से ही नदी में फेंके गए कचरे से इतनी तेज बदबू आ रही है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे परेशान नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुबह से पुरवाई हवा चलने के कारण कचरे की दुर्गंध सीधे विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में पहुंच रही है।उन्होंने कहा कि विद्यालय के ठीक बगल में इस तरह कचरा डंप किया जाना बेहद चिंताजनक है। बच्चों के पढ़ाई करने वाले स्थान के आसपास इस तरह गंदगी और दुर्गंध का वातावरण होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने नगर परिषद गढ़वा के अध्यक्ष दौलत सोनी से इस गंभीर समस्या का तत्काल समाधान कराने की मांग की है।
पांच वर्षों से झेल रही जनता, अब सवाल—आखिर कब तक?
निदेशक सुशील कुमार केसरी के साथ आसपास के वार्ड के लोगों में सुरेश केसरी, जयप्रकाश केसरी, मनीष केसरी, अमित केसरी, सुमित केसरी समेत अन्य लोगों ने भी नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि नगर परिषद के अध्यक्ष यदि स्वयं एक बार विद्यालय और आसपास के इलाके में आकर स्थिति को देखें और कुछ देर यहां खड़े रहें, तो उन्हें खुद पता चल जाएगा कि लोग किस तरह की दुर्गंध और गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं, बल्कि पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक नगर परिषद द्वारा कचरा डंपिंग के लिए कोई स्थायी और निश्चित स्थान तय नहीं किया जा सका है। शहर के बाजार और आसपास के मोहल्लों से निकलने वाला कचरा जगह-जगह जमा किया जा रहा है, जिससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है।
चुनाव के समय वादे, जीत के बाद सफाई के मुद्दे पर खामोशी!
आक्रोशित लोगों ने कहा कि चुनाव के समय शहर को साफ-सुथरा, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही सफाई से जुड़े वादे मानो कागजों में ही दबकर रह जाते हैं। लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद का मूल उद्देश्य शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाना है तो फिर गढ़वा शहर में जगह-जगह कचरे का अंबार क्यों दिखाई देता है?
लोगों ने कहा कि सफाई व्यवस्था किसी शहर की बुनियादी जरूरत है, कोई एहसान नहीं। बच्चों के विद्यालय के आसपास कचरे का ढेर और दुर्गंध बनी रहना नगर परिषद की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जनता का कहना है कि सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीन पर स्थायी समाधान चाहिए।
अध्यक्ष ने लिया संज्ञान, तत्काल समाधान का निर्देश
इधर, मामले की जानकारी मिलते ही नगर परिषद अध्यक्ष दौलत सोनी ने नगर परिषद के कर्मी रामानुज प्रसाद को समस्या का संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने और जल्द से जल्द समस्या दूर कराने का निर्देश दिया है।अब देखना यह है कि अध्यक्ष के निर्देश के बाद कचरे के इस अंबार से वास्तव में कितनी जल्दी निजात मिलती है और क्या नगर परिषद भविष्य में स्कूलों तथा आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास कचरा डंप किए जाने पर स्थायी रोक लगाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था तैयार करती है।
स्थानीय जनता का सीधा सवाल है—आखिर कब तक शहर के लोग कचरे की दुर्गंध, गंदगी और अव्यवस्था का दंश झेलते रहेंगे? अब जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि कचरा डंपिंग की समस्या का स्थायी और धरातल पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए। वहीं, वार्ड नंबर 5 के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि कृष्ण केसरी से कचरे के डंपिंग को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। इस पर उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के बाद इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता है, तो वार्ड पार्षद प्रतिनिधि के साथ-साथ जनता के सहयोग से धरना देने का भी निर्णय लिया जाएगा।
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