गढ़वा। आज भी देश को अधिकतम मेडल्स की आवश्यकता है, आइए इसके लिए मिलकर संकल्प लेने की जरूरत है।खेलो, स्वस्थ रहो और देश का नाम रौशन...
गढ़वा। आज भी देश को अधिकतम मेडल्स की आवश्यकता है, आइए इसके लिए मिलकर संकल्प लेने की जरूरत है।खेलो, स्वस्थ रहो और देश का नाम रौशन करो।खेल से ही स्वास्थ्य,अनुशासन और राष्ट्र का विकास। खेल से बड़ा कोई अनुशासन मंच नहीं है। स्थानीय जीएन कान्वेंट स्कूल में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक मदन प्रसाद केशरी एवं उपप्राचार्य बसंत ठाकुर के द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अपने संबोधन में निदेशक मदन प्रसाद केशरी ने कहा कि भारत में हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद की जयंती के शुभ अवसर पर मनाया जाता है। ध्यानचंद जी को दुनिया भर में हॉकी का जादूगर कहा जाता है। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हमें यह संकल्प लेना है कि हमें अपने स्वास्थ्य के लिए और अपने देश के लिए लगातार खेलना है और उच्च कोटि का खेल प्रदर्शित कर इस दिवस को सार्थक करना है। यह दिन उत्सव के लिए नहीं बल्कि यह देशवासियों के उन विशेष कर युवाओं को खेलों के महत्व को समझने, शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने और देश के लिए खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है ।भारत सरकार ने वर्ष 2012 में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने की घोषणा की। इसका मुख्य उद्देश्य ध्यानचंद की अद्वितीय खेल प्रतिभा और भारतीय हॉकी में उनके अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धांजलि देना है ।मेजर ध्यानचंद एक ऐसे महान खिलाड़ी तथा राष्ट्र प्रेमी थे, जिन्होंने हिटलर द्वारा दिए गए प्रस्ताव को विनम्रता पूर्वक ठुकरा दिया था।इन्हें भारत सरकार द्वारा खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज के आधुनिक युग में जहां डिजिटल तकनीक और गतिहीन जीवन शैली ने लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है वहीं खेलों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। हाल के वर्षों में भारतीय खेल परिदृश्य में सकारात्मक और अभूतपूर्व बदलाव आएं हैं। भारत अब केवल हॉकी या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा है,बल्कि एथलेटिक्स, बैडमिंटन,कुश्ती, मुक्केबाजी, निशानेबाजी,तीरंदाजी और जैवलिन थ्रो जैसे खेलों में भी विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहा है। राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है बल्कि यह देश के प्रति नागरिक को एक स्वस्थ,सक्रिय और अनुशासित जीवन शैली अपनाने का संकल्प लेने का दिन है। मेजर ध्यानचंद का जीवन और उनकी खेल यात्रा यह सिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि दृढ़ संकल्प कड़ा परिश्रम और देशभक्ति का जज्बा हो तो किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। हमें अपने बच्चों और युवाओं को खेलों में भाग लेने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए। तभी भारत खेल के क्षेत्र में विश्व की महाशक्ति बनने के अपने सपने को पूरा कर सकेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक वीरेंद्र शाह,संतोष प्रसाद,खुर्शीद आलम, दिनेश कुमार, मुकेश भारती,आलोक राज,हीरामन मेहता,नवनीत कुमार, नीरा शर्मा, नीलम कुमारी,शिवानी कुमारी, सुनीता कुमारी, आदि की भूमिका सराहनीय रही।
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