गढ़वा। हड्डी, नस एवं जोड़ संबंधी जटिल बीमारियों के उपचार में अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और वर्षों के अनुभव के बल पर जिले में वि...
गढ़वा। हड्डी, नस एवं जोड़ संबंधी जटिल बीमारियों के उपचार में अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और वर्षों के अनुभव के बल पर जिले में विशेष पहचान बना चुके वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ. नंद किशोर रजक ने एक बार फिर सफल ऑपरेशन कर मरीज और उसके परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है।खरौंधी प्रखंड के मझिगांवा गांव निवासी ज्ञानी भुइया के 8 वर्षीय पुत्र राकेश भुइया आम तोड़ने के दौरान पेड़ से गिर गया था, जिससे उसके दाहिने जांघ की हड्डी गंभीर रूप से फ्रैक्चर हो गई। दुर्घटना के बाद परिजन चिंतित थे, लेकिन उन्हें राहत तब मिली जब बच्चे को नगर ऊंटारी रोड स्थित प्रियदर्शिनी अस्पताल में भर्ती कराया गया।नामधारी कॉलेज के सामने, चेकनाका के समीप स्थित प्रियदर्शिनी अस्पताल में 14 जून को सर्जन डॉ. एन.के. रजक के नेतृत्व में आधुनिक चिकित्सा पद्धति एवं अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है और वह तेजी से स्वस्थ होने की ओर अग्रसर है।
इस अवसर पर डॉ. नंद किशोर रजक ने कहा कि प्रियदर्शिनी अस्पताल में आधुनिक संसाधनों, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के उद्घाटन के बाद से अब तक 500 से अधिक जटिल हड्डी संबंधी ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। उनका लक्ष्य है कि गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़े शहरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों, ताकि उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के महानगरों का रुख न करना पड़े।
सफल ऑपरेशन में अस्पताल के सहयोगी कर्मियों अभय पांडेय, बलराज राम, अश्विनी दुबे, लाल बहादुर मेहता, नागेंद्र तिर्की, हिमांशु गुप्ता, मुकेश उरांव, मंटू, आदित्य तथा बड़ा बाबू विजय राम सहित अन्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी तत्परता, सेवा भावना और समन्वित प्रयासों ने ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।सर्जन डॉ. रजक की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि समर्पण, अनुभव और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के समन्वय से गढ़वा में भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र के लोगों का स्थानीय चिकित्सा संस्थानों पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
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