गढ़वा। जिले में निजी विद्यालयों पर लगातार लग रहे आरोपों और अभिभावकों के बीच फैल रही गलतफहमियों के खिलाफ बुधवार को जिला पब्लिक स्...
गढ़वा। जिले में निजी विद्यालयों पर लगातार लग रहे आरोपों और अभिभावकों के बीच फैल रही गलतफहमियों के खिलाफ बुधवार को जिला पब्लिक स्कूल समन्वय समिति के बैनर तले एक बड़ी और निर्णायक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले भर के सैकड़ों निजी विद्यालय संचालक शामिल हुए और एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखी।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अलखनाथ पांडे ने की, जबकि समापन उपाध्यक्ष सिस्टर रौशना की देखरेख में हुआ। पूरे आयोजन के दौरान निजी स्कूल संचालकों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें बिना वजह बदनाम किया जा रहा है, जबकि वे पूरी तरह सरकारी नियमों के तहत ही विद्यालयों का संचालन करते हैं।
📌 “हर जानकारी सरकार को देते हैं, फिर भी बदनाम क्यों?”
संचालकों ने स्पष्ट कहा कि स्कूल की फीस, शिक्षकों का वेतन, बिल्डिंग टैक्स, होल्डिंग टैक्स समेत हर छोटी-बड़ी जानकारी CBSE पोर्टल, केंद्र और राज्य सरकार को नियमित रूप से दी जाती है। मान्यता भी इन्हीं प्रक्रियाओं के आधार पर मिलती है।“जब सरकार को हर जानकारी है, हर प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, तो हमें ‘चोर-डकैत’ कहना सीधे-सीधे सरकार पर सवाल उठाना है।” — संचालकों ने संयुक्त से कहा कि“किताबों को लेकर भी फैलाई जा रही है भ्रम”बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि किताबों को लेकर अभिभावकों में गलत धारणा फैलाई जा रही है। संचालकों ने कहा—कि स्कूल खुद किताबें नहीं छापते, लाइसेंस प्राप्त कंपनियां ही किताबें प्रकाशित करती हैं,बाजार में NCERT की किताबें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होतीं,बेहतर शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के लिए पब्लिकेशन आधारित किताबें जरूरी होती हैं,“बच्चों को सिर्फ पास नहीं, सक्षम और बुद्धिमान बनाना है, इसलिए बेहतर कंटेंट वाली किताबें देनी पड़ती हैं।”
“गलती हो तो कार्रवाई करें, लेकिन बदनाम न करें”
संचालकों ने साफ कहा कि अगर कोई विद्यालय गलत कर रहा है, तो प्रशासन कार्रवाई करे—even बंद करने का आदेश दे। लेकिन पूरे निजी शिक्षा तंत्र को गलत ठहराना उचित नहीं है।“गढ़वा के उपायुक्त यदि समझते हैं कि हम गलत हैं, तो जांच कर कार्रवाई करें, हम तैयार हैं। लेकिन समाज में भ्रम न फैलाया जाए।”
बैठक में निजी स्कूलों ने सरकार से भी कई अहम सवाल उठाए—जब शिक्षा का अधिकार सभी को है, तो निजी स्कूलों को सुविधा क्यों नहीं?बिजली बिल और होल्डिंग टैक्स से मुक्ति कब मिलेगी?NCERT किताबों की उपलब्धता क्यों सुनिश्चित नहीं की जाती?निजी स्कूलों को कोई मेंटेनेंस सपोर्ट क्यों नहीं?“अगर सरकार सहयोग करे, तो हम और बेहतर सुविधाएं बच्चों को दे सकते हैं।”
“हम तोड़ते नहीं, जोड़ते हैं समाज”
बैठक के अंत में सभी संचालकों ने एकजुट होकर कहा—“हम नियम तोड़ने नहीं, समाज को जोड़ने और बच्चों का भविष्य बनाने का काम करते हैं। हमें बदनाम करने की बजाय सहयोग किया जाए।”मौके पर अलखनाथ पांडे (अध्यक्ष) ने कहा कि“हम पूरी पारदर्शिता के साथ विद्यालय चलाते हैं। सरकार के हर नियम का पालन करते हैं। इसके बावजूद हमें ‘चोर-डकैत’ कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि कोई दोषी है तो उस पर कार्रवाई हो, लेकिन पूरे शिक्षा जगत को बदनाम करना बंद होना चाहिए।”वही सिस्टर रौशना (उपाध्यक्ष) ने कहा कि
“शिक्षा सेवा का क्षेत्र है, व्यवसाय नहीं। हम बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं। समाज को चाहिए कि हमें सहयोग करे, न कि अपमानित करे। बिना सच्चाई जाने आरोप लगाना बेहद गलत है।”वही मदन प्रसाद केसरी (सचिव) ने कहा कि “स्कूल संचालन में एक-एक चीज का हिसाब सरकार को देना पड़ता है। फीस से लेकर टैक्स तक सब पारदर्शी है। फिर भी गलतफहमी फैलाना समझ से परे है। यह शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश जैसा लगता है।”वही संजय सोनी (सह सचिव) ने कहा कि
“अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो प्रशासन उसे बंद करे। लेकिन सभी स्कूलों को एक ही नजर से देखना अन्याय है। हम नियमों के दायरे में रहकर ही काम करते हैं।”वही सुशील केसरी ने कहा कि
“हम लोग समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। हमें अपराधी की तरह पेश करना बहुत ही पीड़ादायक है। समाज को सच्चाई समझनी होगी।”वही अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि
“किताबों को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह गलत है। हम खुद किताब नहीं छापते, लाइसेंस प्राप्त कंपनियों से लेते हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी किताबें देना हमारी जिम्मेदारी है।”वही
एसएन पाठक ने कहा कि“NCERT किताबों की कमी बाजार में साफ दिखती है। ऐसे में हमें वैकल्पिक किताबें लेनी पड़ती हैं। इसे गलत बताना उचित नहीं है। सरकार को पहले व्यवस्था सुधारनी चाहिए।”वही अमित सिंह ने कहा कि“निजी स्कूल सरकार का सहयोगी है, विरोधी नहीं। हम शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का भार कम कर रहे हैं। फिर भी हमें ही कटघरे में खड़ा करना अनुचित है।”वही अमित तिवारी ने कहा कि“अगर सरकार हमें बिजली बिल, टैक्स और अन्य खर्चों में राहत दे, तो हम और बेहतर सुविधा बच्चों को दे सकते हैं। लेकिन बिना सहयोग के हमसे हर अपेक्षा रखना न्यायसंगत नहीं है।”
वही अनूप सोनी ने कहा कि “हम नियमों को तोड़ने नहीं, जोड़ने का काम करते हैं। शिक्षा के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं। हमें बदनाम करना पूरे समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”बैठक के अंत में सभी संचालकों ने एकजुट होकर कहा—“हम पारदर्शिता और नियमों के साथ काम करते हैं। यदि कोई गलत है तो कार्रवाई हो, लेकिन पूरे निजी शिक्षा जगत को बदनाम करना बंद होना चाहिए।”गढ़वा में निजी विद्यालयों का यह खुला आक्रोश आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन के बीच बड़ी बहस का कारण बन सकता है। फिलहाल, संचालकों ने साफ कर दिया है कि वे अब अपनी प्रतिष्ठा और अधिकारों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएंगे।खबर देखने के लिए channel को सब्सक्राइब करें, बेल आइकॉन को दबाएं, लाइक करें औऱ लिंक को शेयर करें।




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