गढ़वा। होली के रंगों के बीच रविवार की शाम गढ़वा का साहित्यिक आसमान ओज, हास्य और व्यंग्य की अनूठी छटा से दमक उठा। शहर की अग्रणी स...
गढ़वा। होली के रंगों के बीच रविवार की शाम गढ़वा का साहित्यिक आसमान ओज, हास्य और व्यंग्य की अनूठी छटा से दमक उठा। शहर की अग्रणी साहित्यिक संस्था सृजन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में स्थानीय गोविंद उच्च विद्यालय के मैदान में भव्य हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।कार्यक्रम का शुभारंभ मिर्जापुर से पधारी कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने माँ सरस्वती की वंदना से किया। इसके बाद उन्होंने श्रृंगार रस से सराबोर गीतों की सस्वर प्रस्तुति देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। “हुए प्यार के सिलसिले देख ले, मिट गए सारे शिकवे गिले देख ले…” और भोजपुरी रचना “आग लागी त कुछ पल लहकबे करी, फूल कौनो रही पर महकबे करी…” पर श्रोताओं ने जमकर तालियाँ बजाईं।सीतामढ़ी से आए कवि प्रशांत बजरंगी ने जब अपनी ओजपूर्ण पंक्तियाँ — “सड़क किनारे भूखा नंगा दिखता है, मंदिर-मस्जिद खातिर दंगा दिखता है… मत बोलो, मुझको तो बस एक तिरंगा दिखता है…” — सुनाईं, तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी रचनाओं ने सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश दिया।
बनारस से आए सुप्रसिद्ध गीतकार मनोज मधुर ने “भउजी ओरा जाइल बाटे फगुनवा…” और “जब पछुआ बहा रहा पवन, लगता है वसंत आ गया…” जैसे गीतों से फगुनहट का रंग घोल दिया। भभुआ से आए शंकर कैमूरी ने मंच संचालन के साथ-साथ अपनी चुटीली रचनाओं से श्रोताओं को लोट-पोट कर दिया।
मऊ (उ.प्र.) से आए कवि पंकज प्रखर ने ओजस्वी काव्य पाठ से देशभक्ति की लौ प्रज्वलित की। स्थानीय कवि संजय चौबे और दयाशंकर तिवारी ने भी होली गायन से कार्यक्रम में रंग भर दिया। सम्मेलन के पूर्व मंच के सचिव सतीश कुमार मिश्र ने अपने ‘शहरनामा’ के माध्यम से शहर की समस्याओं को व्यंग्यात्मक अंदाज में उठाया।इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि दिनेश प्रसाद सिंह, गढ़वा एसडीओ संजय कुमार, समाजसेवी राकेश पाल, रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ मुरली प्रसाद गुप्ता, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष भृगुनाथ चौबे एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।वही इस मौके पर
मुख्य अतिथि दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि सृजन साहित्यिक मंच ने गढ़वा में साहित्यिक वातावरण तैयार कर एक नई सांस्कृतिक चेतना जगाई है। ऐसे आयोजनों से समाज को सकारात्मक दिशा मिलती है।वही अध्यक्ष विनोद पाठक ने कहा कि मंच का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज को जोड़ना है। होली के अवसर पर आयोजित यह कवि सम्मेलन आपसी सौहार्द और रचनात्मकता का प्रतीक बना।वही विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि गढ़वा में इस प्रकार का साहित्यिक आयोजन होना गौरव की बात है। इससे युवा पीढ़ी में संस्कृति और राष्ट्रभाव की चेतना मजबूत होगी।वही
पूर्व सांसद घुरन राम ने कहा कि कविता समाज का दर्पण है। कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को जिस तरह उठाया गया, वह सराहनीय है।वही
नगर परिषद अध्यक्ष दौलत सोनी ने कहा कि नगर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में ऐसे कार्यक्रमों की अहम भूमिका है। नगर परिषद भविष्य में भी सहयोग के लिए तत्पर रहेगा।वही समाजसेवी राकेश पाल ने कहा कि होली जैसे पर्व पर साहित्यिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। सृजन साहित्यिक मंच का यह प्रयास प्रशंसनीय है।रंग, रस, ओज और व्यंग्य से सजी यह शाम गढ़वा की साहित्यिक स्मृतियों में लंबे समय तक दर्ज रहेगी।अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष विनोद पाठक ने किया, संचालन अधिवक्ता राकेश त्रिपाठी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संरक्षक रासबिहारी तिवारी ने दिया। मीडिया प्रभारी दयाशंकर गुप्त को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में संगठन सचिव राजकुमार मधेशिया, कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार, रामाशंकर चौबे, राजकिशोर राय सहित सभी सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।कार्यक्रम में गढ़वा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी, पूर्व सांसद घुरन राम, गढ़वा नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दौलत सोनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओबैदुल्लाह हक अंसारी, समाजसेवी विजय केसरी, अमृत शुक्ला, सुशील केसरी, कमलेश गुप्ता, मनोज केसरी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




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