गढ़वा। जीएन कान्वेंट स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। स्थानीय जीएन कान्वेंट(10+2) स्कूल में स्वाम...
गढ़वा। जीएन कान्वेंट स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। स्थानीय जीएन कान्वेंट(10+2) स्कूल में स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई जिसमें कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक सह शिक्षाविद मदन प्रसाद केशरी तथा उपप्राचार्य बसंत ठाकुर के द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं स्वामी दयानंद सरस्वती के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अपने संबोधन में निदेशक मदन प्रसाद केशरी ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रबुद्ध,राष्ट्रीय चिंतक, महान शिक्षाविद् व आर्य समाज के संस्थापक थे। इनका जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकारा नामक स्थान पर हुआ था। उनके बचपन का नाम मूल शंकर था। बचपन से ही वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे और सत्य की खोज में लगे रहते थे। स्वामी दयानंद ने समाज में फैली कुरीतियों, आडंबर एवं अंधविश्वासों और जाति पाति के भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने लोगों को वेदों के ज्ञान की ओर लौटने का संदेश दिया।वे मानते थे कि वेद ही सच्चे ज्ञान का स्रोत है। वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि इनमें जीवन के हर पहलू से जुड़ा ज्ञान समाहित है। वेद हमें सत्य बोलने, धर्म का पालन करने, बड़ों का सम्मान करने और समाज में प्रेम व सहयोग की भावना रखने की शिक्षा देते हैं। वास्तव में वेद जीवन जीने की कला सिखाता है।वह प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का भी संदेश देते हैं। वेदों में वसुधैव कुटुंबकम की भावना झलकती है जिसका अर्थ है पूरी पृथ्वी एक परिवार है। उनके ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश ने समाज को अध्यात्म और आस्तिकता से परिचित कराया। वे योगी थे तथा प्राणायाम पर उनका विशेष बल था।आज के आधुनिक युग में जब मनुष्य भौतिक सुख सुविधाओं की ओर अग्रसर हो रहा है तब वेदों की शिक्षाएं हमें संतुलित और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।अंततः कहा जा सकता है कि वेद भारतीय संस्कृति की आत्मा है।वे केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि मानवता के लिए ज्ञान का अमूल्य भंडार है। हमें वेदों के सिद्धांतों को समझकर अपने जीवन में अपनाना चाहिए और आने वाली पीढियां को भी इनके महत्व से अवगत कराना चाहिए।वेदों की शिक्षाएं आज भी इतनी प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पहले थी। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक संतोष प्रसाद, एग्जाम इंचार्ज खुर्शीद आलम, वीरेंद्र शाह, दिनेश कुमार, मुकेश भारती, कृष्ण कुमार, नीरा शर्मा, वर्षा कुमारी,शालिनी कुमारी, सरिता दुबे, श्वेता कुमारी, सुनीता कुमारी,नेहा कुमारी, पूजा प्रकाश आदि की उपस्थिति सराहनीय रही।
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