गढ़वा, 31 अक्टूबर।सदर अस्पताल गढ़वा के उपाधीक्षक सभागार में आज IMA गढ़वा एवं झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (JSHSA) गढ़वा की सं...
गढ़वा, 31 अक्टूबर।सदर अस्पताल गढ़वा के उपाधीक्षक सभागार में आज IMA गढ़वा एवं झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (JSHSA) गढ़वा की संयुक्त बैठक हुई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. कुश कुमार, IMA सचिव डॉ. नीतू सिंह और JSHSA सचिव डॉ. टी. पीयूष ने की। बैठक में डॉ. सुष्मिता रॉबा,पूर्व सचिव डॉ. कुमार निशांत सिंह, डॉ. राजेश कुमार मालवा,डॉ राकेश तरुण, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. शिशिर चंद्राकर, डॉ. सुशील कुमार रमन, डॉ स्नेह लता राज, समेत 19 चिकित्सक उपस्थित रहे।बैठक में डॉ. टी. पीयूष ,सचिव डॉ नीतू सिंह ने सभी चिकित्सकों से एकजुट रहने, निर्भय होकर निष्ठा और ईमानदारी से समाज के हित में कर्तव्य निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सक एक परिवार की तरह एक-दूसरे के साथ खड़े रहें और नए चिकित्सक IMA-JSHSA की सदस्यता लेकर संगठन को मजबूत करें। हर मरीज के साथ परिवार के सदस्य जैसा व्यवहार किया जाए।इसके बाद 10 अक्टूबर को सदर अस्पताल में हुई घटना पर डॉ. जितेंद्र कुमार और डॉ. राजेश कुमार मालवा से विस्तार से जानकारी ली गई। डॉ. मालवा ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल स्व. सुनील कुमार को रात करीब 8 बजे इमरजेंसी में लाया गया। डॉ. जितेंद्र कुमार ने प्रारंभिक उपचार किया, जिसमें एंटीसेप्टिक ड्रेसिंग, टांके, पैर में स्लैब/कच्चा प्लास्टर और दवाइयां दी गईं। डॉ. मालवा की ड्यूटी रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक थी, वे अस्पताल में उपस्थित थे और अन्य गंभीर मरीजों का भी उपचार कर रहे थे। बुलाए जाने पर वे मरीज को देखने गए और गंभीर स्थिति में resuscitation सहित हर संभव प्रयास किया। उन्होंने बताया कि परिजनों ने अभद्र व्यवहार किया और BHT/उपचार के कागजात छीन लिए। पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण स्प्लीन (तिल्ली) की चोट बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि सीमित संसाधनों में आंतरिक चोट का शुरुआती निदान कठिन हो सकता है और आंतरिक रक्तस्राव से स्थिति अचानक बिगड़ सकती है।बैठक में सर्वसम्मति से कहा गया कि डॉ. मालवा द्वारा मरीज को नहीं देखने का आरोप तथ्यों से पुष्टि नहीं होता, इसलिए FIR अनुचित और निराधार है। संगठन ने कहा कि Jacob Mathew बनाम State of Punjab (2005) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में तय दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई है।संगठन की माँग है कि FIR तत्काल निरस्त हो, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन हो, चिकित्सकों को पर्याप्त सुरक्षा मिले, दुर्व्यवहार-हमला-धमकी और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर कठोर कार्रवाई हो और भविष्य में झूठे आरोपों की पुनरावृत्ति न हो।
आम जनता से अपील की गई कि चिकित्सकों पर भरोसा रखें, केवल मरीज की मृत्यु को लापरवाही का प्रमाण न मानें। सरकारी चिकित्सकों को FIR से भयभीत किया जाएगा तो मनोबल टूटेगा और गंभीर मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिसका नुकसान जनता को होगा।अंत में चेतावनी दी गई कि यदि माँगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और चिकित्सकीय कार्यों का बहिष्कार भी किया जा सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।खबर देखने के लिए channel को सब्सक्राइब करें, बेल आइकॉन को दबाएं, लाइक करें औऱ लिंक को शेयर करें।


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