गढ़वा।शहर के बी एन टी सेंट मैरी स्कूल गढ़वा में अध्ययनरत कक्षा 11वीं के विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों के लिए तीन ज...
गढ़वा।शहर के बी एन टी सेंट मैरी स्कूल गढ़वा में अध्ययनरत कक्षा 11वीं के विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों के लिए तीन जनवरी से पांच जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण का सफल आयोजन किया गया। इस संबंध में बताया गया कि इस शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर इतिहास, भूगोल, संस्कृति, पर्यावरण एवं आध्यात्मिक विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कराना था। भ्रमण का मुख्य गंतव्य झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ हिल एवं प्रसिद्ध शिखरजी मंदिर के साथ तलेटी तीर्थ मंदिर रहा। जो देश के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों में से एक है।इस भ्रमण में कक्षा 11वीं के कुल 38 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। जिनके साथ विद्यालय की पांच शिक्षक-शिक्षिकाएँ भी उपस्थित थीं। संपूर्ण यात्रा विद्यालय के प्राचार्य अमित कुमार तिवारी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में अनुशासित, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई। विद्यालय प्रशासन द्वारा यात्रा के दौरान परिवहन, आवास, भोजन, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ उच्च मानकों के अनुरूप की गई थीं। जिससे विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। मौके पर विद्यालय के प्राचार्य अमित कुमार तिवारी ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से परसनाथ हिल झारखंड राज्य की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। जिसकी ऊँचाई लगभग 1,365 मीटर (4,478 फीट) है। यह क्षेत्र प्राचीन भू-आकृतिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विद्यार्थियों को बताया गया कि इस पर्वत का विकास भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है।।जिससे यह स्थल न केवल धार्मिक बल्कि भूगोल और प्राकृतिक विज्ञान के अध्ययन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्वत शिखर तक पहुँचने के लिए हज़ारों सीढ़ियाँ और पर्वतीय पगडंडियाँ पार करते हुए पैदल चढ़ाई की। यह चढ़ाई कठिन अवश्य थी। लेकिन अत्यंत प्रेरणादायक रही। इस दौरान विद्यार्थियों ने अनुशासन, धैर्य, दृढ़ इच्छाशक्ति, शारीरिक क्षमता और सामूहिक सहयोग की भावना का शानदार परिचय दिया। इस अनुभव से विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यात्रा के क्रम में विद्यार्थियों ने तलेटी तीर्थ मंदिर, गुफा मंदिर तथा शिखरजी मंदिर के दर्शन किया। यहाँ उन्हें जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों और धार्मिक सहअस्तित्व के महत्व की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि शिखरजी जैन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र और श्रद्धा का केंद्र है। जहाँ अनेक तीर्थंकारों ने मोक्ष प्राप्त किया था।इन तीन दिनों के दौरान विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण, वन-संपदा, जैव-विविधता और पर्वतीय जीवन शैली को भी नजदीक से देखा और समझा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मंदिरों की वास्तुकला, शिल्पकला, नक्काशी, स्थापत्य शैली और संरचनात्मक संतुलन जैसे पहलुओं का भी बारीकी से अवलोकन किया। जिससे विद्यार्थियों में कला, डिज़ाइन और ऐतिहासिक निर्माण तकनीकों के प्रति रुचि और सम्मान विकसित हुआ। भ्रमण की समाप्ति के बाद सभी छात्र-छात्राएँ एवं शिक्षक-शिक्षिकाएँ सकुशल विद्यालय लौट आए। विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों के अनुशासन, उत्साह और मर्यादित व्यवहार की सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य अमित कुमार तिवारी ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कक्षा-कक्ष से बाहर प्राप्त व्यावहारिक अनुभव जीवन भर उनके व्यक्तित्व, दृष्टिकोण और आत्मविश्वास को सशक्त बनाते हैं। वहीं विद्यालय के निदेशक उमाकांत तिवारी ने इस सफल आयोजन में सहयोग देने वाले अभिभावकों, शिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
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