गढ़वा। जीएन कान्वेंट स्कूल में गीता जयंती के शुभ अवसर पर विद्यालय के सभागार में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए निदेशक सह शि...
गढ़वा। जीएन कान्वेंट स्कूल में गीता जयंती के शुभ अवसर पर विद्यालय के सभागार में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए निदेशक सह शिक्षाविद मदन प्रसाद केशरी ने कहा कि गीता जयंती सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है।यह दिन उस शुभ तिथि का प्रतीक है। जब श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में अर्जुन को अमर उपदेश रूपी भागवत गीता का ज्ञान प्रदान किया था।यह घटना मार्ग शीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को हुई थी। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप मनाया जाता है। गीता कर्म का मूल मंत्र है। भगवत गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि एक जीवन मार्गदर्शक ग्रंथ है। इसमें कर्म, भक्ति, ज्ञान और योग का अद्भुत समन्वय मिलता है।गीता हमें सिखाती है कि मनुष्य को बिना फल की चिंता किए निरंतर अपने कर्तव्य का पालन करते रहना चाहिए। यह ग्रंथ हमें धैर्य, साहस, सत्य, आत्मसंयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। गीता जयंती के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, गीता पाठ, भजन कीर्तन और सत्संग का आयोजन किया जाता है। बच्चे और युवा इस दिन गीता के महत्व को समझते हैं और इसके उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। आज के तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन में गीता का संदेश और भी अधिक बढ़ जाता है। गीता मनुष्य को सकारात्मक सोच व कर्म योग, मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करती है।यह प्रत्येक व्यक्ति को कर्तव्यनिष्ठ, न्याय और निष्काम बनने का मार्ग दिखाती है। तेजगति, प्रतिस्पर्धा और तनाव से भरे इस समय में गीता मनुष्य को मानसिक शांति,स्पष्ट सोच और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है। गीता का कर्मयोग सिद्धांत आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।यह सिखाता है कि इंसान के लिए मन की शांति सबसे बड़ा धन है। गीता का नेतृत्व और प्रबंधन दृष्टिकोण आज की कॉर्पोरेट दुनिया में अत्यंत उपयोगी है। कई प्रबंधक अधिकारी और व्यवसायी गीता के सिद्धांतों को निर्णय लेने, टीमवर्क और नेतृत्व में अपनाते हैं। यह नशा, नकारात्मकता और भ्रम से दूर रहकर आज विश्वास और चरित्र निर्माण में मदद करता है। गीता का सार्वभौमिक संदेश धर्म, सत्य और साहस, सदाचार हर मानवता को जोड़ता है। यह विभिन्न संस्कृति और धर्म में भी सम्मिलित है क्योंकि इसका उद्देश्य जीवन को उत्तम बनाता है। अंत में गीता आधुनिक युग की जटिल समस्याओं, उलझन से मुक्त करता है। इसलिए गीता आधुनिक युग का मार्गदर्शक है। मंच का संचालन विद्यालय के उपप्राचार्य बसंत ठाकुर जबकि धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण कुमार द्वारा किया गया।कार्यक्रम को सफल बनाने में वीरेंद्र शाह, खुर्शीद आलम, विकास कुमार, दिनेश कुमार, नीरा शर्मा,वर्षा कुमारी, चंदा कुमारी, मुकेश भारती,पूजा प्रकाश, शिवानी कुमारी, सरिता दुबे,नीलम केशरी,सुनीता कुमारी, आदि की भूमिका सराहनीय रही।
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