गढ़वा। शहर के चिरौजिया मोड़ स्थित राधिका नेत्रालय के प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार ने आज जानकारी देते हुए बताया कि ...
गढ़वा। शहर के चिरौजिया मोड़ स्थित राधिका नेत्रालय के प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार ने आज जानकारी देते हुए बताया कि डंडई के अम्बेडकर चौक-चौपाल में मोतियाबिंद जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 72 लोगों की नेत्र जांच की गई, जिनमें से 34 मरीज मोतियाबिंद से ग्रसित पाए गए।डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि मोतियाबिंद एक सामान्य लेकिन गंभीर नेत्र समस्या है, जिसका समय पर इलाज अत्यंत आवश्यक है। शिविर में चिन्हित सभी 34 मरीजों का ऑपरेशन आगामी 13 दिसंबर को राधिका नेत्रालय, चिरौजिया मोड़, गढ़वा में किया जाएगा।यह शिविर डंडई क्षेत्र के लोगों में नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ है। स्थानीय लोगों ने राधिका नेत्रालय की टीम द्वारा किए गए प्रयास की प्रशंसा की और इसे ग्रामीण क्षेत्र के लिए बेहद लाभदायक कदम बताया।डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि राधिका नेत्रालय हमेशा से समाज के जरूरतमंद लोगों तक बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रयासरत रहा है, और आगे भी ऐसे शिविर लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।वही
(11 दिसंबर) : निः शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर में 35 मरीजों का सफल उपचार के पश्चात चश्मा पाकर मुस्कुराते हुए लौटे घर गढ़वा।प्रखंड के चिरौंजिया स्थित राधिका नेत्रालय अस्पताल में राधा लक्ष्मी ट्रस्ट और डीबीसीएस गढ़वा के संयुक्त तत्वावधान में 10 दिसंबर को एक नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में 35 मरीजों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था और आज 11 दिसंबर को सभी मरीजों को ऑपरेशन के बाद चश्मा प्रदान कर अस्पताल से विदा किया गया। इन ऑपरेशनों को सफल बनाने में डॉ.सुशील कुमार और उनकी टीम की मेहनत और आधुनिक उपकरणों का बड़ा योगदान रहा।डॉ. सुशील कुमार एवं संचालिका पायल गुप्ता ने कहा कि "मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों के लिए इस तरह के नि:शुल्क शिविर बेहद लाभकारी हैं। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उनके जीवन को नई रोशनी देने का प्रयास है।"यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अहम कदम है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां आर्थिक तंगी के कारण लोग अक्सर जरूरी ऑपरेशन नहीं करवा पाते, ऐसे शिविर उनके जीवन में उम्मीद की किरण बनते हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने इस पहल के लिए डॉक्टरों और आयोजकों को धन्यवाद दिया।इस तरह के शिविरों से न केवल मरीजों को राहत मिलती है, बल्कि यह समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने का बेहतरीन उदाहरण भी है।
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