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नोटिस : गढ़वा समाचार देखने के लिए प्ले स्टोर से गढ़वा समाचार डाउन लोड करे : वीडियो के साथ यूट्यूब पर भी पूरा देखे,खबरे फेसबुक पर भी उपलब्ध है ,यूट्यूब पर सब्सक्राइब जरुर करें और शेयर करना ना भूले गढ़वा :झारखंड भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह गढ़वा रंका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि संपूर्ण भारत में लॉक डाउन होने की वजह से दूसरे प्रदेशों/जिलों में रोजगार की तलाश में गए मजदूर आज दर दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं। मजदूरों/कामगारों का रोजगार छिन गया है। ऐसी स्थिति में उनके सामने खाने-पीने, रहने एवं इलाज का घोर अभाव है। मजदूरी नहीं मिलने के कारण ऐसे लोग अपने घरवालों का जीविकोपार्जन करने में भी असमर्थ हैं। आज मजदूर और उनके परिजनों के सामने भुखमरी की स्थिति है।
झारखंड सरकार द्वारा मजदूरों के खाते में रु 2 हज़ार एवं गरीबों के खाते में रु 1000 जमा करने की घोषणा की गई है, लेकिन
अभी तक किसी भी मजदूरों एवं गरीबों के खाते में पैसा नहीं भेजा गया है। आखिर राज्य सरकार किस मुहूर्त के इंतजार में है? श्री तिवारी ने झारखंड सरकार से मांग करते हुए कहा है कि सरकार अविलंब पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सर्वेक्षण कराकर, राज्य या जिले से बाहर मजदूरी करने गए मजदूरों को चिन्हित करके उनकी सूची बनाए और 24 घंटे के अंदर रोजगार की तलाश में बाहर गए मजदूरों के खाते में रु 5 हज़ार का भुगतान करे एवं उनके परिवार जनों को भी आर्थिक सहयोग दिया जाए ताकि ऐसे लोग भुखमरी से बच सकें। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आज झारखंड की राजधानी कोरोना हॉटस्पॉट बन चुका है। इसलिए राज्य सरकार लॉक डाउन का सख्ती से पालन करवाए ,ताकि अन्य जिलों को कोरोना हॉटस्पॉट बनने से रोका जा सके। साथ ही साथ अन्य प्रदेशों और जिलों में फंसे हुए मजदूरों को संक्रमण से बचाते हुए एवं दूसरे को संक्रमित होने से रोकते हुए, स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराकर उन्हें अपने घर वापसी की भी वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार विचार करे। ऐसा करके ही हम झारखंड को कोरोना के संक्रमण से बचा सकते हैं। यही झारखंड की सवा तीन करोड़ नागरिकों के हित में है।
अभी तक किसी भी मजदूरों एवं गरीबों के खाते में पैसा नहीं भेजा गया है। आखिर राज्य सरकार किस मुहूर्त के इंतजार में है? श्री तिवारी ने झारखंड सरकार से मांग करते हुए कहा है कि सरकार अविलंब पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सर्वेक्षण कराकर, राज्य या जिले से बाहर मजदूरी करने गए मजदूरों को चिन्हित करके उनकी सूची बनाए और 24 घंटे के अंदर रोजगार की तलाश में बाहर गए मजदूरों के खाते में रु 5 हज़ार का भुगतान करे एवं उनके परिवार जनों को भी आर्थिक सहयोग दिया जाए ताकि ऐसे लोग भुखमरी से बच सकें। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आज झारखंड की राजधानी कोरोना हॉटस्पॉट बन चुका है। इसलिए राज्य सरकार लॉक डाउन का सख्ती से पालन करवाए ,ताकि अन्य जिलों को कोरोना हॉटस्पॉट बनने से रोका जा सके। साथ ही साथ अन्य प्रदेशों और जिलों में फंसे हुए मजदूरों को संक्रमण से बचाते हुए एवं दूसरे को संक्रमित होने से रोकते हुए, स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराकर उन्हें अपने घर वापसी की भी वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार विचार करे। ऐसा करके ही हम झारखंड को कोरोना के संक्रमण से बचा सकते हैं। यही झारखंड की सवा तीन करोड़ नागरिकों के हित में है।












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