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गढ़वा :बता दें कि शहर के चिनिया रोड स्थित परमेश्वरी मेडिकल सेंटर अस्पताल परिवार के सोजन्य से मंगलवार कों सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में आई एम ए के सचिव व कुशल सर्जन चिकित्सक डॉ. कुमार निशान्त सिंह व पत्नी डॉ. नीतू सिंह सहित कुल 5 लोगों ने दादाजी स्व.लालाजी के प्रथम पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर आयोजित कर रक्तदान किया । रक्तदान करने वालो में
डॉ. नीतू सिंह,
डॉ. कुमार निशान्त सिंह,
डॉ. अशोक कुमार,
श्रेयांश तरुण,
दीपक श्रीवास्तव "राजन का नाम शामिल है .
विदित हो कि इस पुण्यतिथि पर मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन होना था , लेकिन अब
विषम परिस्थिति को देखते हुए प्रतीकात्मक रूप व छोटे कैम्प का आयोजन किया गया तथा सोशल डिस्टेन्स का भी ख्याल रखा गया।
मौके पर आई एम ए के सचिव डॉ. कुमार निशान्त सिंह ने कहा कि आज हमारा भारत कोरोना वायरस के चपेट में हैं, सभी कार्यक्रम रद्द हो रहे हैं या आगे प्लान भी स्थगित किये जा रहे हैं। आज जो स्थिति है ,उसमें सभी को घर रहने की सलाह दी जा रही है, एक मात्र यही कोशिश कर चैन को ब्रेक कर वायरस से छुटकारा पाया जा सकता है। फिर भी रक्तदान की बात करें ,
तो जरूरतमंदो को लगातार ब्लड की आवश्यकता पड़ रही। यही सोचकर आज अपने दादाजी की प्रथम पुण्यतिथि पर प्रतीकात्मक रूप से व छोटे कैम्प लगाकर स्वैच्छिक रक्तदान किया तथा सोशल डिस्टेन्स को भी विशेष ध्यान रखा।डॉ श्री सिंह ने
सभी गढ़वा वासी से अपील करते हुए कहा कि आप भी कम संख्या में सामाजिक दूरी ध्यान में रखते हुए छोटे छोटे कैम्प लगाएं या तीन महीने पूरे होने पर रक्तदान करें, ताकि इस विषम परिस्थिति में भी जरुरतमन्दो कों रक्त मिल सके। अंत में डॉ निशांत ने अपने दादा जी के पुण्यतिथि में कहा कि मेरे दादा जी का स्वर्गवास हो गया ,परन्तु उनके और अपने बीच के वात्सल्य भाव को मैं जीवन भर भूल नही पाउंंगा, न मैं उन्हें शब्दों का रूप दे सकता हूं .परन्तु उनकी ही प्रेरणा और आर्शीवाद से मैं उन्ही भावों को शब्दों का रूप देने का एक प्रयास कर रहा हूं ,जो मुझे इस दुःख की घड़ी में शायद एक नई चेतना प्रदान करे।श्री सिंह ने कहा कि पापा से जब कुछ मिलता नही, दादाजी तुम्हारा सहारा था।
अब कौन मुझे बतलायेगा जो कहानियों में बचपन गुजरा था। होली-दीवाली जब जब आये आप ही घर की रौनक थे।
अब रंग-दीया सब फिके है जज्बातों की जो ऐनक थे।
आधार हो मेरे दादाजी आर्शीवाद से मैं खिलता रहूँगा
संस्कारों की जो राह बनाई उस पर सदा चलता रहूंगा।







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