गढ़वा। आज गुरु पूर्णिमा के पावन एवं आध्यात्मिक अवसर पर गढ़वा के उत्सव गार्डन प्रांगण में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा समिति, गढ...
गढ़वा। आज गुरु पूर्णिमा के पावन एवं आध्यात्मिक अवसर पर गढ़वा के उत्सव गार्डन प्रांगण में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा समिति, गढ़वा की ओर से श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम समिति के जिला संयोजक संजय कुमार सोनी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में शिक्षक, समाजसेवी, प्रबुद्धजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सभी उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण, नैतिक मूल्यों के संवर्धन तथा समाज में आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का सामूहिक संकल्प लिया।मौके पर समिति के पदाधिकारी विनोद पाठक ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के आह्वान पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जिले के सभी केंद्रों पर हवन-यज्ञ, संकल्प एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। अनेक श्रद्धालुओं ने समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का संकल्प भी लिया।
उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि नैतिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा का व्यापक जनआंदोलन है। समिति द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्राथमिक एवं माध्यमिक वर्ग के विद्यार्थियों के बीच भारतीय संस्कृति, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं आदर्श जीवन शैली पर आधारित परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुटुंब न्यायालय के जिला न्यायाधीश उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक और संस्कारों के निर्माता होते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है। आज के समय में जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, तब गुरु परंपरा और भारतीय संस्कृति का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जैसी पहल बच्चों में नैतिकता, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यदि नई पीढ़ी को बचपन से ही भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ा जाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से देखने को मिलेगा।उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव हैं। उनके द्वारा दिए गए संस्कार ही भविष्य के आदर्श नागरिक तैयार करते हैं। सभी शिक्षकों से उन्होंने आग्रह किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, मानवीय संवेदनाएं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का भी विकास करें, ताकि आने वाली पीढ़ी एक सशक्त, संस्कारित और जिम्मेदार भारत का निर्माण कर सके। इस अवसर पर शिक्षा एवं समाज निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 50 शिक्षकों को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शिक्षकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भोगवादी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवारों में परिवर्तित हो रहे हैं, जिससे तनाव, अशांति और सामाजिक विघटन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने ऋषि-मुनियों के बताए जीवन-दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। यदि समाज पुनः भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों को अपनाए, तो परिवारों में प्रेम, समाज में समरसता और राष्ट्र में एकता एवं शक्ति का संचार होगा। गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व इसी दिव्य संदेश के साथ संपन्न हुआ कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण कल्याण संभव है।खबर देखने के लिए channel को सब्सक्राइब करें, बेल आइकॉन को दबाएं, लाइक करें औऱ लिंक को शेयर करें।




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